सुरत की जानीमानी लेबग्रोन डायमंड्स कंपनी द्वारा १७५ साल पुराने हनुमानजी मंदिर में ईको-फ्रेन्डली डायमंड का मुगुट अर्पण किया जायेंगा

Sarangpur- साळंगपुर हनुमान मंदिर में दिनांक १६ नवम्बर, २०२३ को एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक कार्यक्रम ” श्री कष्टभंजनदेव शतामृत महोत्सव ” हनुमान मंदिर में होने जा रहा है. जिस में सुरत के भंडेरी लेबग्रोन डायमंड्स परिवार की ओर से श्री कष्टभंजनदेव हनुमानजी महाराज को ईको- फ्रेन्डली डायमन्ड से सजा सुवर्ण मुगुट अर्पण कीया जायेगा। यह शतामृत महोत्सव साळंगपुर में हनुमान जी को बिराजमान हुए १७५ साल पूर्ण होने के उपलक्ष्य में यह कार्यक्रम आयोजित कीया गया है ।
एक किवंती अनुसार, जब गोपालानंद स्वामीने हनुमान दादा की प्रतिमा स्थापित की तब प्रतिमा को लोहे के सरीये के साथ स्पर्श कराते ही प्रतिमा जीवंत हो उठी ओर हलचल करने लगी थी। तब से यह आध्यात्मिक गाथा इस मंदिर में आधि-व्याधि को दूर करने के लीये एक परंपरा के रूप में प्रस्थापित हो गइ हे ओर वह एक अनूठा आध्यात्मिक उपचार का केन्द्र भी बन गया है। श्री हनुमान दादा की प्रतिमा पर १००० ग्राम (एक कीलो) सोना ओर ७२०० डायमन्ड में से बना सोने से मढा हुआ मुगुट अर्पण कीया जायेगा ।

साळंगपुर हनुमान मंदिर में १६ नवम्बर, २०२३ के रोज आयोजित इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में कइ सन्मानित व्यक्ति उपस्थित होगे, जिस में भंडेरी लेब ग्रोन डायमन्डस के स्थापक श्री मगनभाई भंडेरी. श्री घनश्यामभाई भंडेरी ओर श्री प्रकाशभाई भंडेरी समाविष्ट है । सालंगपुर स्थित इस शतामृत महोत्सव में वडताल गादी पीठापति प.पू. ध.धुं. श्री १००८
आचार्य श्री राकेश प्रकाश महाराज, कोठारी विवेकसागर दास जी स्वामी तथा अन्य संत, महंत गण उपस्थित होकर आशीर्वचन देगे ।

घनश्याम भाई भंडेरी, भंडेरी लेब ग्रोन डायमन्डस के एक स्वप्नदृष्टा ओर नींव की ईंट रखनेवाले स्थापक है, जीन्होने २००३ से डायमन्ड क्षेत्र में अनेक परिवर्तनशील सीमाचिह्नरूप साफल्य गाथा की शरूआत की थी जो आज एक मिसाल बन गइ है । उन्हो ने वैश्विक फलक पर हर घर तक लेब ग्रोन डायमन्डस पहुंचे इस विझन के साथ लेब ग्रोन डायमन्डस की नींव रखी थी । इस के अलावा वैश्विक बाझार में भंडेरी लेब ग्रोन डायमन्डस एक अनूठा स्धान प्राप्त करे इसलीये वे दिनरात प्रयास कर रहे है ।
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र भाई मोदी की मेक इन इन्डिया की सफल यात्रा में लेब ग्रोन डायमन्डस उद्योग का भीअमूल्य हिस्सा है ओर उन्हो ने मोमेन्टो के तौर पर प्रधानमंत्री श्री द्वारा उनकी अमरिका की यात्रा के दौरान ७.५ केरेट का लेब ग्रोन डायमन्ड अमरिका के फर्स्ट लेडी को भेंट में दीया था ओर आंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी सभी ने सराहना की थी ।
लेब ग्रोन डायमन्ड लेबोरेटरी में उगाये जाते है ओर यह डायमन्ड फिझिकली, केमिकली ओर ओप्टीकली नेचरल हीरे के समान होते है ।
लेब ग्रोन डायमन्ड पर्यावरण को कीसी भी तरह की हानि पहुचाते नहीं होने की वजह से पूरे विश्व में यह डायमन्ड इको – फ्रेऩ्डली डायमन्ड के रूप में मशहूर हुए है ।
लेब ग्रोन डायमन्ड के निर्माण में भारत आज दुनिया में सब से आगे है ।





