गुजरात में कुपोषण ‘मॉडल राज्य’ की असली तस्वीर चिंताजनक

National News: गुजरात, जिसे ‘मॉडल राज्य’ और ‘विकास इंजन’ के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, की असलियत चिंताजनक है। हाल ही में लोकसभा में पेश एक रिपोर्ट के अनुसार, गुजरात में 5 साल से कम उम्र के 39.73 प्रतिशत बच्चे कुपोषित हैं, जिसका मतलब है कि हर चौथा बच्चा इस गंभीर समस्या का शिकार है। इसके साथ ही, 21.39 प्रतिशत बच्चे कम वजन के भी पाए गए हैं।
जून 2024 में कुपोषण की समस्या से जूझ रहे राज्यों में गुजरात का छठा स्थान है। उत्तर प्रदेश में कुपोषण की दर 46.36 प्रतिशत है, जबकि महाराष्ट्र में यह 44.59 प्रतिशत और असम में 41.98 प्रतिशत है। आश्चर्यजनक बात यह है कि गुजरात की स्थिति त्रिपुरा और झारखंड जैसे राज्यों से भी खराब है। 2022 में 51.92 प्रतिशत और 2023 में 43.78 प्रतिशत बच्चे कुपोषित पाए गए थे, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सुधार के प्रयास असफल रहे हैं।
सरकार ने ‘मिशन पोषण 2.0′ के तहत पिछले तीन वर्षों में 2879.30 करोड़ रुपये का फंड आवंटित किया, लेकिन केवल 1310.23 करोड़ रुपये ही खर्च किए गए हैं। बच्चों की कुपोषण और कम वजन की स्थिति में सुधार न होने से यह प्रतीत होता है कि सरकार इस मुद्दे को लेकर गंभीर नहीं है। देश में 36.52 प्रतिशत बच्चे कुपोषित हैं और 16.43 प्रतिशत कम वजन के हैं, जबकि गुजरात का आंकड़ा इनसे भी खराब है। इस प्रकार, गुजरात की स्थिति देश के औसत से भी नीचे है, और यह दर्शाता है कि सरकारी प्रयासों में कमी है।

