हेल्थ & ब्यूटी

ब्रीथफ्री मानसून यात्रा: स्वस्थ फेफड़ों की ओर एक राष्ट्रव्यापी यात्रा

India, 2024: मानसून चिलचिलाती गर्मी से राहत तो देता है, लेकिन श्वसन स्वास्थ्य के लिए यह एक बड़ी चुनौती लेकर भी आता है। बढ़ी हुई आर्द्रता और नमी से फेफड़ों की स्थिति खराब हो सकती है, इसलिए इस मौसम में एहतियाती उपाय करना बहुत ज़रूरी है।[1]  इस बात को ध्यान में रखते हुए सक्रिय रोगी देखभाल के लिए निरंतर प्रतिबद्धता के अनुरूप, सिप्ला की व्यापक रोगी सहायता पहल – ब्रीथफ्री ने अपनी मानसून यात्रा शुरू की। इसका उद्देश्य लोगों को उनकी श्वसन स्वास्थ्य स्थिति को समझने में मदद करना है। इसलिये यह यात्रा अस्थमा और सीओपीडी (क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) जैसी फेफड़ों की पुरानी बीमारियों के लिए जांच तक पहुंच बढ़ाती है। तीन महीनों के दौरान, देश भर में 4,000 से अधिक शिविर आयोजित किए जाएंगे, जिनमें 350,000 से अधिक लोगों की जांच की जाएगी। 

गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) में उल्लेखनीय वृद्धि के साथ भारत एक बढ़ते स्वास्थ्य संकट का सामना कर रहा है। यहाँ श्वसन संबंधी पुरानी बीमारियाँ देश में होने वाली सभी मौतों में से लगभग 60% के लिए शिखर की तीन एनसीडी में से एक जिम्मेदार हैं।[2] बीमारी का जल्दी से जल्दी पता चलने और हस्तक्षेप से लक्षणों और जीवन की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है, अस्थमा और सीओपीडी के अधिकांश मामलों का निदान नहीं हो पाता है। गंभीर अस्थमा के लक्षणों वाले लगभग 70% व्यक्तियों का चिकित्सीय रूप से पता नहीं चलता है,[3] जबकि अनुमानित 95-98% सीओपीडी के मामलों का निदान नहीं हो पाता है।[4] यह बीमारी के बारे में जागरूकता, पहचान और प्रबंधन में सुधार के लिए देशव्यापी प्रयासों की तत्काल आवश्यकता को बताता है, जिसे बढ़ी हुई स्क्रीनिंग के साथ-साथ परामर्श के अवसरों और निरंतर समर्थन के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है। यह मानसून जैसे उच्च जोखिम वाले मौसमों के दौरान विशेष रूप से सच है।

डॉ. नरेंद्र बी. रावल, चेस्ट फिजिशियन, अहमदाबाद जोर देकर कहते हैं, “मानसून कई ट्रिगर्स लेकर आता है, जिसमें बढ़ी हुई नमी, फफूंद, ठंडी हवा और वायरल संक्रमण का अधिक जोखिम शामिल है। हालांकि, ये कारक किसी भी व्यक्ति के श्वसन स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं, लेकिन वे पहले से मौजूद श्वसन संबंधी बीमारियों वाले व्यक्तियों के लिए महत्वपूर्ण चुनौतियां पेश करते हैं। नमी वाले वातावरण में पनपने वाले एलर्जेन, जैसे कि फफूंद और धूल के कण, एलर्जी प्रतिक्रियाओं को जन्म दे सकते हैं और अस्थमा के साथ-साथ सीओपीडी के लक्षणों को भी खराब कर सकते हैं, जिससे संभवतः अटैक हो सकता है। 1 दरअसल , शोध में पाया गया है कि आंधी-तूफान के बाद अस्थमा के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि होती है, जिसमें तीव्र श्वसनी-आकर्ष (ऐक्यूट ब्रोनकोस्पैज्म) भी शामिल है, जिसे  थंडरस्टॉर्म अस्थमा” के नाम से जाना जाता है। [5] ब्रीदफ्री मानसून यात्रा जैसी पहल समय पर जांच के साथ-साथ रोग प्रबंधन, सही उपकरण तकनीकों पर परामर्श और उपचार के पालन पर जोर देने के लिए महत्वपूर्ण है, खासकर ऐसे मौसमों के दौरान जब ये स्थितियां गंभीर हो जाती हैं।” [6]

सिप्ला की ब्रीदफ्री पहल अस्थमा और सीओपीडी रोगियों के लिए स्क्रीनिंग, परामर्श और उपचार अनुपालन के क्षेत्रों में व्यापक सहायता संसाधन प्रदान करने में सहायक रही है। ऑन-ग्राउंड स्क्रीनिंग कैंप से लेकर अब एआई-सक्षम ब्रीदफ्री डिजिटल एजुकेटर प्लेटफॉर्म और डिवाइस प्रशिक्षण ‘कैसे करें’ का वीडियो तक ब्रीदफ्री श्वसन संबंधी समस्याओं से पीड़ित लोगों के लिए वन-स्टॉप सहायता समाधान के रूप में विकसित हुआ है। ब्रीदफ्री मानसून यात्रा इन प्रयासों की निरंतरता है, जो यह सुनिश्चित करती है कि देश भर के लोगों को मौसम की परवाह किए बिना स्वतंत्र रूप से सांस लेने के लिए आवश्यक जानकारी और संसाधन उपलब्ध हों।

जागरूकता और कार्रवाई का सहयोगात्मक दृष्टिकोण ब्रीथफ्री जैसी पहल को आगे बढ़ाता है। साथ ही बेरोक, जिंदगी और टफीज जैसे जागरूकता अभियान भी चलाए जाते हैं। इनका उद्देश्य अस्थमा के प्रति लोगों की धारणा को खत्म करना और प्रभावी उपचार को बढ़ावा देना है – ये प्रयास मरीजों के लिए समर्थन का एक मजबूत नेटवर्क बनाते हैं।

अधिक जानकारी के लिए : www.breathefree.com पर आइये।

Related Articles

Leave a Reply

Back to top button