पारंपरिक विधि से बनी देशी अरहर दाल: स्वाद और गुणवत्ता की गारंटी

यह पोस्ट देशी अरहर की दाल के पारंपरिक तरीके से तैयार होने की प्रक्रिया को लेकर है। देखने में भले ही यह दाल सुंदर न हो, लेकिन स्वाद में इसका कोई मुकाबला नहीं। पारंपरिक विधि से बनाई गई दाल में स्वाद की सौ प्रतिशत गारंटी है।
पहले, अरहर को खेत से निकालकर खलिहान में रखा जाता था। दाने को छिलके से अलग करने के लिए छकनी और मुंगरी का उपयोग होता था। इसके बाद, अरहर को सेंककर और चकिया में दरा कर दाल बनाई जाती थी। छिलके उतारने के लिए ओखरी पहरूवा का इस्तेमाल होता था। जो दाल टूट जाती थी, उसे अलग करके चूनी की रोटी बनाने के लिए रखा जाता था।
अरहर दाल की पकाने की विधि भी खास होती थी। सेंकी हुई दाल से बनी दाल में हल्दी, मिर्च, लहसुन का मसाला डालकर और खटाई या कच्चे आम डालकर पकाया जाता था। यह दाल इतनी स्वादिष्ट होती थी कि छौंकने की जरूरत नहीं होती थी।
आजकल के आधुनिक तरीकों से हटकर पारंपरिक तरीके से बनी दाल का स्वाद अद्वितीय है। इस प्रक्रिया से तैयार दाल का अनुभव आप सभी को एक बार जरूर लेना चाहिए। अगर आपको यह जानकारी उपयोगी लगी हो, तो लाइक और शेयर करें, और अपने विचार कमेंट में जरूर व्यक्त करें।





