टीचर की चुनौती और पापा की रणनीति

पापा ने जैसे ही ऑफिस में कदम रखा, तभी फोन की घंटी बजने लगी। उन्होंने फोन उठाया और दूसरी तरफ से एक मीठी लेकिन सख्त आवाज सुनाई दी, “सर, नमस्कार! मैं आपकी बेटी की क्लास टीचर बोल रही हूँ। आज सेकंड क्लास की पैरेंट्स टीचर मीटिंग है, जिसमें रिपोर्ट कार्ड दिखाया जाएगा। कृपया आप अपनी बेटी के साथ समय पर पहुंचें।”
पापा की समझ में नहीं आया कि वे क्या करें। ऑफिस में काम का दबाव था, लेकिन आदेश के पाबंद, उन्होंने तुरंत छुट्टी ली और बेटी को लेकर स्कूल के लिए निकल पड़े। स्कूल पहुंचने पर उन्होंने देखा कि क्लासरूम में गुलाबी साड़ी पहने, छोटी सी बिंदी लगाए, एक बेहद तेज-तर्रार और गोरी सी मैडम बैठी हुई थीं। उनके चेहरे पर एक अजीब सी सख्ती थी।
पापा ने कुछ बोलने की कोशिश की, लेकिन मैडम ने उन्हें डांटते हुए कहा, “आप अभी रुकिए, मैं आपसे अलग से बात करूंगी।”
पापा ने अपनी बेटी की तरफ देखा, जो खुद को छुपाने की कोशिश कर रही थी, और फिर दोनों चुपचाप पीछे जाकर बैठ गए। “मैम बहुत गुस्से में लगती हैं,” बेटी ने धीरे से कहा। पापा भी धीरे से बोले, “तुम्हारा रिपोर्ट कार्ड तो शायद ठीक नहीं होगा।”
बेटी ने चिंतित स्वर में कहा, “मुझे नहीं पता पापा, मैंने तो अब तक देखा ही नहीं।”
पापा ने हल्के से मुस्कुराते हुए कहा, “लगता है आज तुम्हारी मैम तुम्हारे साथ मेरी भी क्लास लेने वाली हैं।”
दोनों आपस में फुसफुसा ही रहे थे कि तभी मैम ने आवाज दी, “हाँ, अब आप दोनों आ जाइए।”
पापा और बेटी दोनों डरते-डरते मैम के पास पहुंचे। बेटी पापा के पीछे छुप कर खड़ी हो गई।
मैम ने रिपोर्ट कार्ड निकालते हुए कहा, “देखिए, आपकी बेटी की शिकायतें तो बहुत हैं, लेकिन पहले आप इसकी परीक्षा की कॉपियां और रिपोर्ट देखिए। फिर बताइए कि इसे कैसे पढ़ाया जाए।”
उन्होंने अंग्रेजी की कॉपी सामने रखी और कहा, “पहले इसे देखिए, आपकी बेटी इसमें फेल है।”
पापा ने एक नजर बेटी की तरफ डाली, जो सहमी-सहमी खड़ी थी। फिर मुस्कुराते हुए बोले, “मैम, अंग्रेजी तो विदेशी भाषा है। इस उम्र में बच्चे अपनी ही भाषा ठीक से नहीं समझ पाते, तो अंग्रेजी कैसे समझेंगे?”
मैम को पापा की यह बात नागवार गुजरी। उन्होंने थोड़ी खीझते हुए हिंदी की कॉपी निकालकर कहा, “तो ये देखिए, आपकी बेटी हिंदी में भी फेल है। इसका क्या कहना चाहेंगे?”
पापा ने फिर बेटी की तरफ देखा, मानो उसकी आँखों में “मुझे माफ कर दो” लिखा हो। पापा ने कहा, “मैम, हिंदी एक कठिन भाषा है। यह ध्वनि आधारित है, जैसा बोला जाता है, वैसा ही लिखा जाता है। अब आपके इंग्लिश स्कूल में कोई शुद्ध हिंदी बोलने वाला शायद ही हो।”
मैम को यह सुनते ही और गुस्सा आ गया। उन्होंने पापा की बात को बीच में काटते हुए कहा, “और बाकी बच्चे? वे कैसे पास हो जाते हैं? और आपकी बेटी क्यों नहीं?”
पापा ने बिना झिझके जवाब दिया, “मैं बाकी बच्चों के बारे में नहीं बता सकता, लेकिन…”
इस बार मैम ने पापा की बात को काटते हुए कहा, “और ये देखिए, ये कंप्यूटर में भी फेल है। आज के बच्चे मोबाइल और लैपटॉप की रग-रग से वाकिफ हैं, तो आपकी बेटी कंप्यूटर में कैसे फेल हो गई?”
पापा ने गंभीरता से कॉपी को देखा और बोले, “मैम, ये कोई उम्र है कंप्यूटर पढ़ने और मोबाइल चलाने की? अभी तो बच्चों को फील्ड में खेलना चाहिए।”
मैम का पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया था। उन्होंने सारी कापियां समेटते हुए कहा, “साइंस की कॉपी दिखाने से तो कोई फायदा नहीं है। क्योंकि मैं जानती हूँ, अल्बर्ट आइंस्टीन भी बचपन में फेल होते थे।”
पापा इस बार चुपचाप थे। मैम ने एक गहरी सांस ली और फिर शिकायतों की फेहरिस्त जारी रखी, “आपकी बेटी क्लास में डिसिप्लिन में नहीं रहती, शोर करती है, इधर-उधर घूमती है।”
पापा ने इस बार मैम को बीच में रोकते हुए कहा, “मैम, वह सब छोड़िए! गणित की कॉपी कहां है? उसका रिजल्ट तो बताइए।”
मैम ने मुंह फेरते हुए कहा, “उसे दिखाने की जरूरत नहीं है।”
पापा ने जिद्दी लहजे में कहा, “जब सारी कापियां दिखा दीं, तो वह क्यों बाकी रह गई?”
मैम ने अनमने मन से गणित की कॉपी निकालकर पापा को थमा दी। पापा ने देखा कि गणित के नंबर बाकी सभी विषयों से अलग थे—100%!
पापा ने इस बार मैम की ओर देखा और सवाल किया, “तो मैम, मेरी बेटी को अंग्रेजी कौन पढ़ाता है?”
मैम ने धीरे से जवाब दिया, “मैं।”
“और हिंदी कौन पढ़ाता है?”
“वो भी मैं।”
“और कंप्यूटर?”
“वो भी मैं।”
पापा ने मुस्कुराते हुए पूछा, “और गणित कौन पढ़ाता है?”
मैम इस बार कुछ बोल पाती, उससे पहले ही पापा ने खुद जवाब दिया, “मैं।”
मैम ने झेंपते हुए सिर हिलाया, “हाँ, पता है।”
पापा ने अपनी बेटी की ओर देखकर गर्व से कहा, “तो अच्छा टीचर कौन है? और हाँ, दुबारा मुझसे मेरी बेटी की शिकायत मत करना। बच्ची है, शरारत तो करेगी ही।”
मैम तिलमिलाकर खड़ी हो गईं और गुस्से से बोलीं, “मिलना तुम दोनों आज घर पर! दोनों बाप-बेटी की अच्छे से खबर लेती हूँ!”
पापा और बेटी हंसते हुए क्लासरूम से बाहर निकल गए, मानो उन्होंने कोई बड़ी जीत हासिल कर ली हो।





