केष्टो मुखर्जी: सिनेमा के कॉमिक जादूगर की जीवन यात्रा

फिल्मों में केष्टो मुखर्जी ने भले ही लोगों को खूब हंसाया हो। लेकिन असल जीवन में वो एकदम धीर-गंभीर किस्म के इंसान थे। अपने घर पर वो फिल्मों की बात करना ज़रा भी पसंद नहीं करते थे। ना ही वो चाहते थे कि उनके बच्चे कभी फिल्म लाइन में आएं। बच्चों के बीच उनकी छवि एक सख्त पिता की थी। एक ऐसा पिता जो नियम तोड़ने पर बच्चों की भी पिटाई कर देता था। आज केष्टो मुखर्जी साहब का जन्मदिवस है दोस्तों। चलिए, उनके बारे में कुछ जानते हैं।
07 अगस्त 1925 को केष्टो मुखर्जी का जन्म कोलकाता में हुआ था। केष्टो जी एक बेहद पढ़े-लिखे परिवार में पैदा हुए थे। उनके पिता सुरेंद्रनाथ भी वैल एजुकेटेड थे। इसलिए केष्टो साहब की पढ़ाई-लिखाई भी बहुत अच्छी तरह से हुई थी। बहुत लोग यकीन नहीं करेंगे लेकिन ये बात सच है कि केष्टो मुखर्जी साहब ने अंग्रेजी लिटरेचर में पीएचडी की थी। और कॉलेज के दिनों से ही केष्टो मुखर्जी साहब को एक्टिंग करने का शौक भी हो गया था। कॉलेज में होने वाले हर नाटक में वो हिस्सा लेते थे।
कॉलेज खत्म होने के बाद केष्टो मुखर्जी साहब ने बांग्ला थिएटर जॉइन कर लिया। वहां अभिनेता बिस्वजीत और अभिनेत्री राखी भी थिएटर किया करते थे। एक दिन केष्टो मुखर्जी साहब पर नज़र पड़ी ऋत्विक घटक जी की। ऋत्विक घटक अपने समय के नामी बंगाली डायरेक्टर व लेखक थे। ऋत्विक घटक को केष्टो मुखर्जी की एक्टिंग पसंद आई। उन्होंने केष्टो साहब को अपनी एक फिल्म में काम करने का ऑफर दिया जिसे केष्टो जी ने स्वीकार भी कर लिया।
ऋत्विक घटक की उस फिल्म का नाम था नागरिक। यूं तो वो फिल्म 1952 में ही कंप्लीट हो गई थी। लेकिन जाने किन वजहों से वो फिल्म बहुत समय बाद, 1977 में रिलीज़ हो पाई थी। इस फिल्म के बाद और भी कुछ बांग्ला फिल्मों में केष्टो मुखर्जी ने काम किया था। फिर एक दिन इनकी मुलाकात ऋषिकेश मुखर्जी से हुई। ऋषि दा ने इन्हें अपनी फिल्म मुसाफिर के लिए साइन किया। वो फिल्म 1957 में रिलीज़ हुई थी। इस फिल्म में केष्टो मुखर्जी का काम ऋषि दा को बहुत पसंद आया था।
फिर तो ऋषि दा ने केष्टो मुखर्जी को अपनी लगभग हर फिल्म में कास्ट किया। समय के साथ केष्टो मुखर्जी कामयाबी की तरफ बढ़ते चले गए। उन्होंने अपने समय के लगभग हर बड़े स्टार के साथ काम किया। 1970 में जब नामी डायरेक्टर असित सेन मां और ममता फिल्म पर काम शुरू करने वाले थे तो कॉमेडियन के रोल के लिए वो उस दौर के बड़े कॉमेडियन्स जैसे जॉनी वॉकर, महमूद और जगदीप के पास गए थे। लेकिन उन तीनों संग असित सेन जी की बात नहीं बन पाई।
आखिरकार असित सेन केष्टो मुखर्जी साहब से मिले। उन्होंने वो रोल केष्टो जी को ऑफर किया। केष्टो जी ने भी खुशी-खुशी वो रोल स्वीकार कर लिया। और इस तरह वो पहली फिल्म बनी जिसमें केष्टो मुखर्जी साहब ने शराबी का किरदार निभाया। केष्टो जी ने शराबी का वो रोल कुछ इस तरह निभाया कि हर कोई इनका कद्रदान हो गया। और फिर तो ये फिल्मों में अधिकतर शराबी के किरदारों में ही दिखे। कहना चाहिए कि केष्टो मुखर्जी उस रोल के बाद टाइपकास्ट हो गए।
केष्टो मुखर्जी साहब की निजी ज़िंदगी की बात करें तो साल 1964 में केष्टो मुखर्जी साहब ने शादी कर ली थी। उनकी पत्नी का नाम छाया था। उनके दो बेटे हुए थे। रंजीत व इंद्रजीत। केष्टो मुखर्जी के बड़े रंजीत की 1985 में मृत्यु हो गई थी। उनका छोटा बेटा इंद्रजीत उनकी ही तरह एक एक्टर है। वो बबलू मुखर्जी के नाम से जाने जाते हैं। उन्होंने कई हिंदी फिल्मों व टीवी शोज़ में काम किया है। अपने पिता केष्टो मुखर्जी के नाम से बबलू एक एक्टिंग स्कूल भी चलाते हैं।
अपने पूरे करियर में केष्टो मुखर्जी साहब ने लगभग सौ फिल्मों में काम किया था। उनकी आखिरी फिल्म थी 1981 में आई पांच कैदी। और फिर अगले साल यानि 1982 में ही वो भयानक पल भी आ गया जब केष्टो मुखर्जी को बेवक्त ये दुनिया छोड़कर जाना पड़ा। एक सड़क दुर्घटना में केष्टो मुखर्जी बुरी तरह घायल हो गए थे। उनकी जान बचाने की बहुत कोशिशें की गई थी। लेकिन बहुत ज़्यादा खून बह जाने की वजह से 4 मार्च 1982 को केष्टो मुखर्जी साहब का निधन हो गया।
केष्टो मुखर्जी साहब भले ही अब इस दुनिया में ना हों। लेकिन उनकी फिल्में हमेशा रहेंगी, जो सिनेमा के शौकीनों को हंसाती-गुदगुदाती रहेंगी। किस्सा टीवी केष्टो मुखर्जी साहब को ससम्मान याद करता है। और उन्हें नमन करता है। शत शत नमन।





