पत्नी का अनकहा त्याग: बाबा जी की एक महत्वपूर्ण सलाह
"रिश्तों की कद्र: पत्नी की सेवा और पति की जिम्मेदारियाँ"
एक व्यक्ति एक बाबा जी के सामने अपनी पत्नी के दोष बता रहा था। बाबा जी ने उससे पूछा, “तुम्हारा धोबी कौन है?” वह व्यक्ति बोला, “मेरी पत्नी।” बाबा जी ने फिर पूछा, “तुम्हारा बावर्ची कौन है?” व्यक्ति बोला, “मेरी पत्नी।” बाबा जी ने कहा, “तुम्हारे घर की साफ-सफाई वाला कौन है?” वह व्यक्ति बोला, “मेरी पत्नी।” बाबा जी ने कहा, “तुम्हारी और तुम्हारे माता-पिता की सेवा कौन करता है?” व्यक्ति बोला, “मेरी पत्नी।” बाबा जी ने फिर पूछा, “जब तुम और तुम्हारे बच्चे बीमार होते हैं तो तुम्हारी और तुम्हारे बच्चों की देखभाल कौन करता है?” व्यक्ति बोला, “मेरी पत्नी।”
बाबा जी ने पूछा, “तुम्हारे घर और माल की हिफाजत कौन करता है?” व्यक्ति ने कहा, “मेरी पत्नी।” बाबा जी ने पूछा, “तुम्हारे दुख-सुख का साथी कौन है?” व्यक्ति ने उत्तर दिया, “मेरी पत्नी।” फिर बाबा जी ने पूछा, “क्या तुम्हारी पत्नी इन सब कामों का तुमसे वेतन लेती है?” व्यक्ति बोला, “नहीं लेती।” बाबा जी ने कहा, “तुमने अपनी पत्नी के दोष बता दिए, लेकिन उसके गुणों को भूल गए और ना ही तुमने उसको समझा। तुम्हारी पत्नी सब कार्य करने के बाद तुमसे वेतन नहीं लेती। बस इतनी सी आशा रखती है कि तुम उसका ख्याल रखो, उससे प्यार करो और आदर-सम्मान करो!”🙏🏿





