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पूरे पेशे को बदनाम किया संदीप घोष की सदस्यता निलंबित होने के बाद आईएमए प्रमुख

भारतीय चिकित्सा संघ (आईएमए) ने 29 अगस्त को कोलकाता के आरजी कर मेडिकल अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल डॉ. संदीप घोष की सदस्यता निलंबित कर दी। यह निर्णय हाल ही में सामने आए एक गंभीर मामले के संदर्भ में लिया गया है, जिसमें एक प्रशिक्षु डॉक्टर के कथित बलात्कार और हत्या की सीबीआई जांच चल रही है।

आईएमए के अध्यक्ष ने इस कार्रवाई के पीछे के कारणों को स्पष्ट करते हुए कहा कि डॉ. संदीप घोष द्वारा किए गए कार्यों से पूरे चिकित्सा पेशे की छवि पर नकारात्मक असर पड़ा है। अध्यक्ष ने कहा कि पेशेवर नैतिकता और मानक बनाए रखना आईएमए की प्राथमिक जिम्मेदारी है, और किसी भी सदस्य द्वारा पेशे को बदनाम करने वाली कार्रवाई को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

डॉ. संदीप घोष के खिलाफ यह कदम उस समय उठाया गया जब कोलकाता की प्रशिक्षु डॉक्टर की मौत की जांच सीबीआई द्वारा की जा रही है। इस मामले ने चिकित्सा क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है और कई सवाल खड़े किए हैं। आईएमए ने अपने बयान में कहा कि यह निलंबन पेशेवर आचार संहिता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और चिकित्सा समुदाय की मान्यता को बनाए रखने के लिए लिया गया है।

आईएमए की इस कार्रवाई के बाद, यह संदेश साफ है कि किसी भी सदस्य की अनुशासनहीनता या पेशेवर मानकों के उल्लंघन के प्रति संगठन की जीरो टॉलरेंस नीति है। इस निर्णय से आईएमए ने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि चिकित्सा पेशे की प्रतिष्ठा और सम्मान बना रहे।

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