राजनीति

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल ने नबान्न मार्च के बाद सीएम ममता पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनदेखी का आरोप लगाया

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल, सीवी आनंद बोस, ने 27 अगस्त को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना की है। यह टिप्पणी तब की गई है जब कोलकाता में नबान्न मार्च के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अनुपातहीन बल का इस्तेमाल किया।

नबान्न मार्च एक राजनीतिक विरोध प्रदर्शन था जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए थे। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया, पानी की बौछारें छोड़ीं और लाठीचार्ज किया। राज्यपाल का कहना है कि इस दौरान पुलिस का व्यवहार सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के खिलाफ था, जो कि सार्वजनिक विरोध प्रदर्शनों को शांतिपूर्ण तरीके से नियंत्रित करने की सलाह देते हैं।

राज्यपाल ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार ने जानबूझकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनदेखी की और पुलिस के अत्यधिक बल के प्रयोग को सही ठहराया। उन्होंने कहा कि यह न केवल न्यायपालिका की अवमानना है बल्कि नागरिकों के मौलिक अधिकारों का भी उल्लंघन है।

इस विवाद ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई गर्मी पैदा कर दी है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्यपाल के आरोपों का खंडन करते हुए कहा है कि पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अपनी जिम्मेदारी निभाई और किसी भी प्रकार की अतिरिक्त बल का प्रयोग नहीं किया।

इस स्थिति पर राजनीतिक दलों और नागरिक समाज के विभिन्न वर्गों ने अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं, और यह स्पष्ट हो गया है कि यह मुद्दा आगे भी विवाद का विषय बना रहेगा।

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